"ग्लोबल क्लासरूम" में मेरा अनुभव

मनुष्य एक समाजिक प्राणी है। जिसमें एक सबसे प्रभावशाली गुण है जीवनपर्यन्त सीखने की अभिलाषा। किसी भी क्षेत्र का विशेषज्ञ होने के लिए हमे लगातार सीखना पड़ता है। सीखने की कोई उम्र नही होती या कहे कि सीखने  के लिए कोई छोटा बड़ा नही होता  ।  एक शिक्षक भी तभी अच्छा शिक्षक बन सकता जब उसमें सीखाने  से ज्यादा सीखने की इच्छा हो। मेरी उस अभिलाषा को ग्लोबल क्लासरूम ने बल दिया। ग्लोबल क्लासरूम जिसका आधार ही क्रियाकलाप हैं न केवल छात्रों के लिए नया था बल्कि अध्यापकों के लिए भी बिल्कुल अजनबी था वो भी भाषा जैसे विषय में क्रियाकलाप!! हमने विज्ञान को  प्रयोगिक तरीके से सीखा है पर भाषा को भी विभिन्न प्रकार के क्रियाकलापो द्वारा सीखना बहुत ही रुचिकर, सृजनात्मक है।गलोबल क्लासरूम में हर रोज कुछ नया सीखने व करने के लिए है।
ग्लोबल क्लासरूम में बच्चों के लिए ऐसे बहुत सारे क्रियाकलाप है जो बच्चो को न ही प्रेरित करते बल्कि उत्साहित भी रखते है कुछ उदाहरण जैसे  विलोम शब्द सीखने के लिए  शारीरिक क्रिया, समानार्थक शब्द सीखने के लिए फ्लैशकार्ड का प्रयोग कर पौराणिक कार्डखेल इत्यादि। कक्षा 5 के छात्रों का पहले दिन कक्षा में स्वागत, शिक्षक छात्रों के नाम के पहले अक्षर का प्रयोग कर उससे एक कविता का चार्ट कक्षा में लगा कर करे। यह पहले मुझे बहुत मुश्किल व अस्वीकारीय लगा पर जब मैंने लिखना शरू किया तो बहुत अच्छा और कुछ नया समझ आया। अंतत एक सन्तोष मिला।
ग्लोबल क्लासरूम ने मेरे अंदर एक इच्छा या अफसोस की काश में भी आज इस स्कूल में शिक्षक नही बल्कि एक छात्र होती…..
रुमा जैन